आ जाना तुम फिर

 

जब से तुम गई हो,

बंद है तुम्हारा कमरा वैसा ही,

आ जाना तुम फिर,

दरवाजा खोलकर देखना तुम अपने कमरे को,

फिर भीतर आकर खिड़की खोलना,

तरस गई है धूप उस खिड़की से अंदर आने को,

एक-एक किरण उछल कर अंदर आएगी,

और उसके पीछे लग कर गुलाबी ठंड भी आएगी,

देखनावो अमलतास के गुच्छों वाली टहनी खिड़की से अंदर आएगी,

और साथ ही उस टहनी पर बैठी छोटी गोरैया भी.

अपना हारमोनियम जरूर उठाना,

थक गया है वह भी एक ही जगह बैठे-बैठे,

एक-एक खटका छूना,

फिर कोई राग भी सुनाना,

और गाना भी.

गाना सुनाना वो वाला,

जो अक्सर तुम गाती हो,

‘रहें ना रहें हम’…

 

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